Published By:धर्म पुराण डेस्क

ठीक भी हो सकती है क्योंकि लाइलाज नहीं है मिर्गी

एपिलेप्सी-

जो दौरे किसी विशेष प्रेरक जैसे तेज बुखार, शराब या लो ब्लड प्रेशर के कारण नहीं पड़ते उन्हें मिर्गी कहा जाता है। इसमें दौरे बार-बार पड़ते हैं। जब मस्तिष्क में स्थायी रूप से परिवर्तन हो जाता है और मस्तिष्क असामान्य संकेत भेजता है तब मिर्गी के दौरे पड़ते हैं।

डॉ. मनोज खनल कहते हैं-

मिर्गी को दौरा पड़ने खेळखा जाती है जिससे मिरगी के दौरे पड़ने के साथ ही मस्तिष्क व्यक्ति के ध्यान केंद्र की क्षमता और व्यवहार बदल जाता है। हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि सिर्फ 15 प्रतिशत मामलों में ही इस रोग का कारण पारिवारिक इतिहास होता है जो पुरानी अवधारणा के विपरीत है।

मिर्गी एक लाइलाज रोग नहीं है। अधिकतर मामलों में दवाइयों द्वारा इसका पूरी तरह उपचार संभव है। कई लोगों के लिए सर्जरी भी इसका एक कारगर उपचार है।

कारण-

गिरने से सिर पर गहरी चोट लग जाना, स्ट्रोक ब्रेन ट्यूमर, डिमेशिया और अल्जाइमर्स जैसी बीमारिया संक्रमण जैसे मेरेजाइटिस, मस्तिष्क में फोड़ा हो जाना एवं एड्स, जन्मजात मानसिक समस्याएं, भावनात्मकदानी की कमी, गर्भावस्था के दौरान कुछ जटिलताएं सो जाना, अत्यधिक शराब का सेवन, मस्तिष्क को रक्त कोशिकाओं की मान्यता जो मस्तिष्क के उनकों को नुकसान पहुंचाती है या नष्ट कर देती है।

मिथ और तथ्य-

एपिलेप्सी ऊपरी हवा या जादू-टोने के कारण होती है?

• मिर्गी का जादू-टोने या भूत-प्रेत से कोई संबंध नहीं है। सच्चाई तो यह है कि मिर्गी एक बीमारी है जिसका इलाज संभव है।

मिर्गी एक संक्रामक रोग है-

 • मिर्गी एक संक्रामक रोग नहीं है और यह रोग व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलता है। इस रोग से पीड़ित लोग सामान्य वैवाहिक जीवन जी सकते हैं।

मिर्गी एक जन्मजात रोग है। इसका कारण आनुवंशिक है?

• किसी को किसी भी समय मिर्गी रोग हो सकता है। 

कुछ लोग इस रोग के साथ जन्म लेते हैं, जबकि दूसरों को बचपन में या वयस्क होने पर पहला दौरा पड़ता है। मिर्गी के दूसरे प्रमुख कारण भी हैं जैसे सिर में लगी गहरी चोट, ब्रेन ट्यूमर और स्ट्रोक अधिकतर मामलों (लगभग 65-70 प्रश्न) में इस रोग के कारणों का पता नहीं है।

मिर्गी से बुद्धिमता प्रभावित होती है।

 • इस रोग से पीड़ितों को सीखने में परेशानी हो सकती है अगर उन्हें बार-बार चक्कर आते है। मिर्गी एक गंभीर रोग है जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। 

• कई लोगों को बार-बार दौरे पड़ते हैं, किसी-किसी को रोज-रोज दौरे पड़ते हैं तो किसी को साल में एक बार। कुछ लोगों का इस रोग का प्रबंधन इतना अच्छा होता है कि उन्हें एक दशक या उससे अधिक समय तक दौरा नहीं पड़ता है।

मिर्गी का दौरा पड़ना एक मेडिकल इमरजेंसी है-

• अक्सर मिर्गी के दौरे मेडिकल इमरजेंसी नहीं होते हैं। लेकिन अगर दौरा पांच मिनट या उससे अधिक समय तक रहता है या एक के बाद एक लगातार दौरे पड़ते हैं और रोगी को दौरों के बीच में होश भी नहीं आता है या दौरा पड़ने के कारण पीड़ित गिर जाता है या जिसे दौरा पड़ा है वह डायबिटीज का रोगी या गर्भवती महिला है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

जैसे ही किसी को मिर्गी को दौरा पड़ने खेळखा जाती है का दौरा पड़े तुरंत ही उसके मुंह में चम्मच या उंगली डाल देना चाहिए।

यह बिलकुल मिथ्या अवधारणा है। जिस व्यक्ति को दौरा पड़ा है अगर आप बलपूर्वक उसके मुंह में कुछ डालेंगे तो इससे उसके दांतों को नुकसान पहुंच सकता है, उसके मसूड़े कट सकते हैं या उसके जबड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। 

सही फस्ट एड यह है कि पीड़ित के सिर को किसी चीज से सहारा देकर थोड़ा ऊंचा करते हुए एक करवट लेटा दें, उसे चोटिल होने से बचाएं और इस बात का ध्यान रखें कि वह सामान्य रूप से सांस से ले पाए। कुछ लोग दौरा पड़ने पर पीड़ित को जूता सुघाते हैं। यह पूरी तरह गलत और निराधार उपाय है।
 

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