Published By:धर्म पुराण डेस्क

Diwali 2023: कब है दिवाली? 12 या 13 नवंबर को मनाये  ये पर्व, जानें सही जानकारी

Diwali 2023: दिवाली कब है? अगर इस तरह का प्रश्न आपके दिमाग में घूम रहा है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. इस आर्टिकल के जरिये आपको सही तिथि और मुहूर्त के बारे में बताने वाले हैं. दिवाली का पर्व भगवान श्रीराम की विजय से जुड़ा हुआ है.

मान्यता है कि दशहरा पर लंकापति रावण का वध कर भगवान राम माता सीता को लेकर अयोध्या लौटे थे. अपने राजा के आगमन पर अयोध्या वासियों ने दीपक जलाकर, आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया था. तभी से दिवाली का ये पर्व बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा हैं.

पंचांग के अनुसार, दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या की तिथि पर मनाया जाता है. मान्यता के मुताबिक, दशहरा से 20 दिन बाद दिवाली का पर्व मनाने की परंपरा है. इस साल दिवाली का त्यौहार 12 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा. ये पर्व पूरे देश में मनाया जाता है. इस दिन के लिए सरकारी अवकाश भी घोषित किया जाता है.

दिवाली का पर्व है 5 दिवसीय-

हिन्दू धर्म में दिवाली का पर्व पांच दिनों तक मनाया जाता है. इन 5 दिनों में अलग-अलग पर्व मनाये जाते हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है. तो चलिए जानते हैं इन पर्व का नाम, डेट और शुभ मुहूर्त-

1. धनतेरस- 10 नवंबर 2023-  शाम 05:47 से 07:43 बजे तक.

2. छोटी दिवाली- 11 नवंबर 2023- शाम 5:39 बजे से 8:16 तक.

3. दिवाली- 12 नवंबर 2023- शाम 05:39 बजे से 07:35 तक.

4. गोवर्धन पूजा- 13 नवंबर 2023- सुबह 6:14 से लेकर 8:35 तक.

5. भाई दूज- 14 नवंबर 2023- दोपहर 1:10 बजे से 3:22 तक.

दिवाली पर ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा-

दिवाली पूजन के लिए सबसे पहले लक्ष्मी जी की चौकी बनाना चाहिए. फिर इस पर एक लाल कपड़ा बिछाएं. फिर एक मुट्ठी चावल रखकर चौकी के मध्य में रखें. लक्ष्मी जी की पूजा शुरू करने से पहले कलश की स्थापना का भी विधान है. 

चावल के बीचो-बीच में एक तांबा, पीतल या चांदी का कलश रखें. कलश में आधा पानी भरें और उसमें गेंदे का फूल, चावल के कुछ दाने, एक धातु का सिक्का और 1 साबुत सुपारी रखें. कलश के मुख पर पांच आम के पत्ते रखें. इन आम के पत्तों पर हल्दी की एक छोटी प्लेट रखें और हल्दी से कमल का फूल बनाएं.

पूजा के दौरान लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति या चित्र को चौकी के केंद्र में रखें. ध्यान रखें कि मूर्ति को कलश के दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही रखें. इसके बाद लक्ष्मी जी के सामने चावल की एक छोटी सी थाली रखें और चावल पर हल्दी से कमल का फूल बनाएं. साथ ही सिक्के, नोट, सोने की गिन्नी आभूषण आदि रख सकते हैं. 

साल भर परिवार के सभी लोगों पर मां लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे, इसके लिए परिवार के सभी लोग चौकी के पास एकत्र होकर माता के सामने बैठकर और कलश पर तिलक लगाएं, इसके बाद आरती करें. लक्ष्मी जी की पूजा करने के बाद मां को चावल के दाने, फूल और जल चढ़ाएं.

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