Published By:धर्म पुराण डेस्क

निर्भयता: जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षा

जीवन में निर्भयता का महत्वपूर्ण स्थान होता है, क्योंकि निर्भयता ही हमें सच्चे जीवन का संरचनात्मक रूप देती है। भय की आवश्यकता है जब खतरे के सामने हमें सतर्क रहना चाहिए, परन्तु बच्चों को हमेशा निर्भय बनने के मार्ग में दिशा मिलनी चाहिए।

भयभीत होने से मनुष्य की सोच और दृष्टिकोण विकसित नहीं होते, वरन् मन में विकल्पनाएं और संवादनाएं पैदा होती हैं। निर्भयता की आवश्यकता वह समय होती है जब किसी विपदा से बचाव का उपाय निकालना होता है, परन्तु यह एक जीवन शैली नहीं होनी चाहिए।

बच्चों की मानसिकता को सकारात्मक और संवेदनशील बनाने के लिए, हमें उन्हें सुरक्षित महसूस कराने के साथ-साथ निर्भय भी बनाना चाहिए। उन्हें समय-समय पर अपनी शक्तियों को पहचानने का मौका देना चाहिए ताकि वे स्वयं को साबित कर सकें।

भयानक सपनों या डरावने विचारों के सामने स्वयं को मजबूत बनाने के लिए, श्रद्धापूर्वक भगवद गीता की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए। अपनी आत्मा की ऊँचाइयों को समझकर, वे अपने आप को प्रकृति की शक्तियों से संजोकर अपने आत्म-समर्पण के माध्यम से निर्भय बन सकते हैं।

इस प्रकार, बच्चों को निर्भय बनाने के उपायों के माध्यम से हम उन्हें सहायक और सक्रिय नागरिक बना सकते हैं, जो समाज के विकास में योगदान करेंगे।

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