Published By:धर्म पुराण डेस्क

जरूरी है सिर को चोट से बचाना

सड़क दुर्घटनाओं में अथवा किसी भी वजह से सिर में आई चोट जानलेवा साबित हो सकती है। हेड इंजरी के कारण कई युवाओं को जीवन भर के लिए अपाहिज बना देती है। गंभीर हेड इंजरी से पीड़ित केवल 15 प्रतिशत लोगों की ही जान बच पाती है। बाकी 85 प्रतिशत में से अधिकतर लोग मर जाते हैं और कुछ लोग गंभीर स्थिति में रहते हैं, तो कुछ लोग कोमा में चले जाते हैं।

एक अनुमान के अनुसार अस्पतालों में लंबे समय तक भर्ती रहने वालों में से लगभग 20-30 प्रतिशत हेड और स्पाइनल इंजरी से पीड़ित होते हैं। 

मस्तिष्क, खोपड़ी या दोनों को किसी भी प्रकार की चोट लगने को हेड इंजरी कहते हैं। इसमें छोटी-मोटी खरोंचें, गूमड़ से लेकर मस्तिष्क की गंभीर चोट सम्मिलित है। खोपड़ी की हड्डी फ्रैक्चर हो जाना, मस्तिष्क का कोई भाग क्षतिग्रस्त हो जाना, रक्तस्राव होना, मस्तिष्क में या उसके आसपास के ऊतकों में सूजन आना गंभीर हेड इंजरियां हैं जो जानलेवा साबित हो सकती हैं।

मुश्किल होता है उपचार-

उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि सिर का कौन-सा भाग चोटिल हुआ है और चोट कितनी गंभीर है। हेड इंजरी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें प्रमुख हैं, सड़क दुर्घटनाएं, गिरना, मारपीट, खेलकूद के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं, वैसे अधिकतर मामलों में खोपड़ी मस्तिष्क को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है, लेकिन जब दुर्घटना गंभीर होती है तो मस्तिष्क भी क्षतिग्रस्त होने से नहीं बच पाता है। कई मामलों में उपचार के बावजूद नतीजा हाथ नहीं लगता है।

थक्का जम जाता है खून का-

हेमेटोमा रक्त नलिकाओं के बाहर रक्त के जमा होने या थक्का बनाने को हेमेटोमा कहते हैं। अगर हेमेटोमा मस्तिष्क में हो जाता है तो यह काफी गंभीर हो जाता है। हेमरेज अनियंत्रित रक्तस्राव को हेमरेज कहते हैं। यह मस्तिष्क के आसपास भी हो सकता है या मस्तिष्क के ऊतकों में भी हो सकता है। 

जब हमारा मस्तिष्क हमारी ही खोपड़ी की कठोर दीवारों से टकराता है तो इसे कनकुशन कहते हैं। इससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली अस्थायी रूप से प्रभावित होती है। लेकिन अगर कनकुशन बार-बार हो तो मस्तिष्क स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है।

इडिमा जब मस्तिष्क पर चोट लगने के कारण उसके आसपास के या मस्तिष्क के ऊतकों में ही सूजन आ जाती है तो इसे इडिमा कहते हैं। मस्तिष्क के ऊतकों में सूजन आना अधिक गंभीर है। 

खोपड़ी की हड्डी बहुत मजबूत होती है इसलिए इसमें फ्रैक्चर आसानी से नहीं आते। लेकिन जब खोपड़ी में फ्रैक्चर आ जाता है तो यह स्थिति काफी गंभीर होती है। इसमें रक्त स्राव नहीं होता है, लेकिन मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

हालांकि दूसरी चोटों की तरह यह बाहर से दिखाई नहीं देती है लेकिन इसे काफी गंभीर माना जाता है। इसके कारण मस्तिष्क स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है या मृत्यु भी हो सकती है। 

हेड इंजरी के लक्षण सिरदर्द, सिर में हल्कापन लगना, सिर घूमना, भ्रमित होना, जी मचलाना, कानों में घंटी बजना (यह अस्थायी रूप से होता है) और इसके गंभरी लक्षणा है जैसे कि बेहोश हो जाना, दौरा पड़ना, उल्टी होना, शरीर का संतुलन गड़बड़ा जाना, आंखों को किसी चीज पर केंद्रित करने में समस्या आना। मांसपेशियों पर नियंत्रण न रहना। स्मृति भंग हो जाती है। रोजाना के शारीरिक क्रियाकलापों को संपन्न करने के लिए दूसरों की सहायता लेना पड़ता है।


 

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