Published By:धर्म पुराण डेस्क

संतान सुख के लिए लाखों दंपत्ति पहुंचते हैं नागलवाड़ी मंदिर

नागपंचमी से पहले खुले भीलट देव मंदिर के पट

सेंधवा. 

मंगलवार को नागपंचमी है। इस दिन एमपी के प्रसिद्ध नागलवाड़ी शिखर धाम स्थित भीलट देव मंदिर में लाखों भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। 

मंदिर के पुजारी राजेंद्र बाबा ने बताया कि इस साल मंदिर के पट 40 घंटे तक खुले रहेंगे। 1 अगस्त सुबह 6 बजे से पट खोल दिए गए हैं और अब 2 अगस्त की रात 10 बजे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे। 

यहां मेले का आयोजन भी हो रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए करीब 500 पुलिसकर्मी के साथ 500 वालंटियर भी जगह- जगह तैनात रहेंगे। मेले और मंदिर में करीब 9 लाख श्रद्धालुओं के शिखर धाम आने की संभावना है।

महिलाएं यहां मुख्यत: संतान प्राप्ति के लिए आती हैं। कहा जाता है कि इसलिए एक किन्नर ने भी भीलट देव से संतान प्राप्ति की मन्नत मांग ली थी। भीलट देव के आशीर्वाद से किन्नर को गर्भ भी ठहर गया था, पर बाद में उसकी मौत हो गई। 

सेगांव रोड पर किन्नर की समाधि शिला भी लगी हुई है। इसके बाद से ही कोई भी किन्नर यहां रात में नहीं रुकता। किन्नर सूर्यास्त तक गांव की सीमा से बाहर चले जाते हैं। 

कहा जाता है कि बाबा भीलट देव का जन्म 853 साल पहले हरदा जिले में नदी किनारे स्थित रोलगांव पाटन के एक गवली परिवार में हुआ था। बाबा को ही लोग नाग देवता के रूप में पूजते हैं। 

पौराणिक कथा के अनुसार बाबा भीलट देव ने अपनी शक्तियों से जनमानस की सेवा के लिए ग्राम नागलवाड़ी को ही चुना था। यहां बड़ी संख्या में संतान के सुख से वंचित दंपति पहुंचते हैं।


 

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