Published By:धर्म पुराण डेस्क

कान में पानी जाने से रोकें, वरना हो सकता है 'इन' 6 समस्याओं का खतरा, कभी न करें इसे इग्नोर

कान की समस्याओं का इलाज -

कई बार हमारे शरीर के संवेदनशील अंग जैसे आंख, कान और नाक में ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, जो दर्दनाक हो जाती हैं. अगर इन अंगों का समय रहते इलाज नहीं किया गया तो ये दूसरे अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

कई बार आपने अपने कानों में पानी रिसते हुए देखा या महसूस किया होगा, जिसे नजरअंदाज करने पर कान की समस्या हो सकती है। दरअसल ये कान में पानी जमने की वजह से होता है। कई बार नहाते समय या बारिश में भीगने पर पानी कान में चला जाता है इससे पानी जमा हो जाता है। 

ऐसे में हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियां और कुछ इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। कान में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। इसके कई गलत परिणाम हो सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे करें इनकी देखभाल।

कई बार पानी कान की यूस्टेशियन ट्यूब में प्रवेश करता है, जिससे मध्य कान के संक्रमण सहित यूस्टेशियन ट्यूब में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। 

कान में पानी जाने से स्वीमर्स ईयर का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या को ओटिटिस एक्सटर्ना के नाम से भी जाना जाता है। ज्यादातर तैराकों को यह समस्या होती है या जो लोग लंबे समय तक तैरना पसंद करते हैं। इससे कानों में नमी आती है। इस समस्या से कान में बैक्टीरिया के पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है। 

इस अवस्था में आपके कानों में खुजली, दर्द और सूजन भी हो सकती है। इस स्थिति में ईयर वैक्स हमें ओटिटिस एक्सटर्ना से लड़ने में मदद करता है। यह उपचार की शुरुआत में शुरू किया जाना चाहिए अन्यथा यह कान नहर को भी प्रभावित कर सकता है।

मध्यकर्णशोथ -

ओटिटिस ईयर मध्य कान का संक्रमण है। इसे मध्य कान के संक्रमण के रूप में भी जाना जाता है। इस स्थिति में कान में दबाव बन जाता है। यह समस्या तीन प्रकार की होती है, जिनमें से एक एक्यूट ओटिटिस मीडिया है। इस स्थिति में कान के पिछले हिस्से में सूजन आ जाती है। 

नाक और गले में इंफेक्शन भी कई बार इस समस्या का कारण बन सकता है। यदि कान में पानी कुछ समय में नहीं निकाला जाता है, तो मध्यकर्णशोथ हो सकता है।

दिमागी चोट -

कान में पानी जाने के कारण व्यक्ति के मन में सबसे पहले सिर हिलाने की बात आती है। ऐसा करने से ब्रेन डैमेज हो सकता है। जिन बच्चों के कान में पानी होता है, उनके सिर में दर्द होने पर उनके मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। 

मस्तिष्क तक ऑक्सीजन ले जाने में भी कठिनाई हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर ज्यादातर बच्चों को अपना शिकार बनाती है। बुजुर्ग लोग भी ईयर वैक्स के बाद अपना सिर हिलाने लगते हैं।

कान में पानी आने के बाद जब हमारे पास कोई उपाय नहीं होता है तो हम कान में उंगली डालने लगते हैं। यह नाखूनों में बैक्टीरिया को कान नहर के माध्यम से यूस्टेशियन ट्यूब तक ले जाता है। यह ट्यूब आपके कान, नाक और गले से जुड़ी होती है। यूस्टेशियन ट्यूब की वजह से यह आपके गले और नाक को भी प्रभावित कर सकता है।

मेनियार्स का रोग -

यद्यपि मेनियार्स रोग का कोई स्पष्ट कारण नहीं है, यदि द्रव (पानी) कान से नहीं निकलता है और कान में जमा हो जाता है, तो रोग होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में चक्कर आने के साथ-साथ हमें सुनने में भी परेशानी होती है। इसे नजरअंदाज न करें वरना बाद में आप बहरेपन के शिकार हो सकते हैं। इसके लक्षण समय के साथ बिगड़ते जाते हैं।

कान से पानी निकलते ही कई बार हम कान में उंगली डालकर ईयर वैक्स को अंदर धकेल देते हैं। इससे ईयरवैक्स अंदर जाकर जम जाता है। इस स्थिति को टिनिटस कहा जाता है। 

टिनिटस से कानों में बजने जैसी आवाजें आती है। ऐसे में आवाज न होने पर भी हमें आवाज सुनाई देती है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को रात में सोने में भी परेशानी हो सकती है। कान की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जब कान में पानी जमा हो जाए तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे निकाल दें।

नोट: (यह खबर शोधकर्ताओं द्वारा किए गए चिकित्सा अनुसंधान और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। 'puran मीडिया' का इसमें कोई अपना मत नहीं है। इसलिए किसी भी चिकित्सा उपचार से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर से उचित परामर्श आवश्यक है।)


 

धर्म जगत

SEE MORE...........