Published By:धर्म पुराण डेस्क

दुख रुक जाता है, क्योंकि मनुष्य उसे दुलारता है..

जिस पर किसी उपकार का भार न हो। जिसका मन किसी के द्वारा किए गए नुकसान से परेशान नहीं है, जिसका दिल दूसरों के प्रति राग द्वेष से नहीं भरता है, जिसके मन से अहंकार पूरी तरह से विसर्जित हो गया है। और मन धन के चंगुल से मुक्त हो जाता है। 

अनासक्त मूल्य में स्थिर है, और जीवन भर समता धारण कर चुका है, अर्थात सुख-दुख को स्वीकार कर लेता है, वही मनुष्य सुखी माना जाता है, उसका जीवन धन्य है, वह इस जीवन में परम सुख को लूट सकता है|

हमेशा मानव जीवन में दुख तो चलता रहेगा, सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, इसलिए सुख के बाद दुख आता है, और दुःख के बाद सुख आता है, दुख रुक जाता है, क्योंकि मनुष्य उसे दुलारता है और लगातार ध्यान करता है। यह हमारे कारण रुक जाता है, यदि आप इसे अनदेखा करते हैं, तो यह बह जाएगा|

मानव जीवन में जो कुछ भी भ्रमित करने वाला है, उससे बाहर निकलने का एक तरीका है, आपके अपने जीवन के अभ्यासों और प्रथाओं का पालन करके आपके सभी दुख, जीवन के उतार-चढ़ाव, चिंताएं और विपत्तियां आप पर सीधे और सटीक तरीके से आई हैं, क्योंकि आप अपने ही कर्म है। 

मनुष्य जीवन में सुख या दुख कोई और नहीं दे सकता, इतना कि मनुष्य को खुद को समझना पड़े, इस प्रकार सुख दुख और कर्मों का कारण है। यानी आप इसके लायक है। इसे सहने के बाद, इससे अनुभव लेकर आप और अधिक सशक्त, समझदार और उदार बनते हैं और अपना आध्यात्मिक परिवर्तन करते हैं, यही जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका है। जो हुआ उसे भूल जाओ। 

आपका भविष्य का जीवन इस पर निर्भर करता है। आज ज्यादातर लोग हमेशा खुद पर ध्यान दे रहे हैं और यह दुनिया के लिए खतरनाक है। आप प्रतिदिन एक घंटे ध्यान में बैठ कर एक अलग मानसिक ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं और अपने मस्तिष्क को हर दिन बहुत शांत होने का प्रशिक्षण भी दे सकते हैं। इसमें तो कोई शक ही नहीं है। 

आध्यात्मिक विश्वास के साथ नियमित ध्यान सुख और शांति प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है।

मनुष्य की खुशी छोटी-छोटी बातों में निहित है। आप कितनी चीजों के बिना भी चल सकते हैं। वही आपकी समृद्धि है। और आनंद के साथ जीवन जीना ही जीवन है।


 

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