Published By:धर्म पुराण डेस्क

शरीर: एक अन्तर्निहित सच्चाई

शरीर मेरा नहीं है अनन्त ब्रह्माण्डों में अनन्त वस्तुएँ हैं, पर उनमें से तिनके- जितनी वस्तु भी हमारी नहीं है, फिर शरीर हमारा कैसे हुआ? यह सिद्धांत है कि जो वस्तु मिलती है और बिछुड़ जाती है, वह अपनी नहीं होती। शरीर मिला है और बिछुड़ जाएगा, इसलिए वह अपना नहीं है। अपनी वस्तु वही हो सकती है, जो सदा हमारे साथ रहे और हम सदा उसके साथ रहें। 

यदि शरीर अपना होता तो यह सदा हमारे साथ रहता और हम सदा इसके साथ रहते। परन्तु शरीर एक क्षण भी हमारे साथ नहीं रहता और हम इसके साथ नहीं रहते। एक वस्तु अपनी होती है और एक वस्तु अपनी मानी हुई होती है। भगवान् अपने हैं; क्योंकि हम उन्हीं के अंश हैं- 'ममैवांशो जीवलोके' (गीता 15।7)। वे हमसे कभी बिछुड़ ही नहीं। परन्तु शरीर अपना नहीं है, प्रत्युत अपना माना हुआ है। जैसे नाटक में कोई राजा बनता है, कोई रानी बनती है, कोई सिपाही बनते हैं तो वे सब नाटक करने के लिये माने हुए होते हैं, असली नहीं होते। ऐसे ही शरीर संसार के व्यवहार (कर्तव्य-पालन) के लिये अपना माना हुआ है।

शरीर का यथार्थ स्वरूप समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हम अपने आत्मा के साथ एक सात्त्विक सम्बन्ध बना सकते हैं। यह सत्य है कि शरीर समय के साथ बदलता रहता है, लेकिन हमारी आत्मा अद्वितीय और अनंत होती है।

शरीर की अस्तित्व: गुढ़ और असच्चा

हमारा शरीर असल में हमारा नहीं होता है, क्योंकि यह बदलता रहता है, और फिर एक दिन छोड़ जाता है। शरीर के परिवर्तनों से जुड़ा हुआ हमारा सत्त्व नहीं होता। असल में, शरीर एक साधना होता है, जिसे हमारी आत्मा का उपयोग करता है संसार के व्यवहारों के लिए।

आत्मा: नित्य और अद्वितीय

हमारी आत्मा सदैव हमारे साथ रहती है और कभी नहीं छोड़ती है। यह सत्ता हमें हमेशा निरंतरता की अनुभव कराती है और हमारे सबसे आंतरिक स्वरूप को प्रतिष्ठित करती है। हम अपने शरीर के परिवर्तनों के बावजूद अद्वितीय और अनंत आत्मा के रूप में हमें पहचान कर उसके साथ रहना चाहिए।

सत्यता की खोज: अपनी आत्मा का अनुसरण करें

आत्मा को जानने के लिए हमें अपनी आत्मा का अनुसरण करना चाहिए, और शरीर के परिवर्तनों के पीछे छिपी सच्चाई को समझने का प्रयास करना चाहिए। इस सत्य को जानकर हम सद्गुणा में बन सकते हैं और सम्पूर्णता के साथ अपनी आत्मा को पहचान सकते हैं।

समर्पण: आत्मा की महत्वपूर्ण सच्चाई

इस प्रकार, शरीर और आत्मा का सम्बन्ध अद्वितीय होता है, और हमारे आत्मा के नित्यत्व की खोज करने से हम अपने जीवन को सर्वोत्तम तरीके से जी सकते हैं। यह हमारे अद्वितीय आत्मा के अद्वितीयता को समझकर हमारे जीवन को महत्वपूर्ण बना सकता है।

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