Published By:धर्म पुराण डेस्क

जून के आखिरी दो दिन भगवान विष्णु को समर्पित, दोनों ही तिथियां पुण्य फलदायी

देवशयनी एकादशी और वामन द्वादशी जून महीने के आखिरी दो दिनों को भगवान विष्णु को समर्पित किए जाते हैं।

देवशयनी एकादशी, जो शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है, विष्णु भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होती है। यह तिथि श्री हरि (विष्णु) की पूजा, व्रत और ध्यान करने का अद्वितीय दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा भी होती है।

वामन द्वादशी, जो कृष्ण पक्ष की द्वादशी होती है, भगवान विष्णु के द्वारा अपने वामन अवतार की स्मृति के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, ध्यान और दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। ये दो दिन विष्णु भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और वे इन तिथियों पर विशेष आराधना और पूजा करते हैं।

जून के आखिरी दो दिन भगवान विष्णु को समर्पित रहेंगे। 29 जून को देवशयनी एकादशी रहेगी और 30 तारीख को वामन द्वादशी होगी। दोनों ही दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत किया जाएगा। स्नान-दान के लिए भी ये दिन खास रहेंगे।

29 जून को देवशयनी एकादशी और 30 जून को वामन द्वादशी होगी। ये दो दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा, व्रत, स्नान, और दान करने के लिए आदर्श माने जाते हैं। विष्णु भक्त इन दिनों पर भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर बताते हैं। 

व्रतारोपण, पूजा, जप, ध्यान और स्नान के साथ-साथ देवशयनी एकादशी और वामन द्वादशी के दिन दान करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और पुण्य फल मिलता है। ये दिन धार्मिकता और सात्विक जीवन के आदर्श होते हैं जब भगवान की उपासना और सेवा की जाती है।

देवशयनी एकादशी भारतीय हिन्दू परंपरा में महत्वपूर्ण एक पर्व है। यह पर्व शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और श्रावण मास के कृष्ण पक्ष के पहले दिन को पड़ता है। "देवशयनी" शब्द संस्कृत भाषा में देवताओं की यात्रा का अर्थ होता है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। भगवान विष्णु के भक्त इस दिन उनकी उपासना करते हैं और उनके लिए विशेष भोग और प्रसाद प्रदान करते हैं। इस दिन जागरण आयोजित की जाती है, जिसमें भक्तजन रात भर जागते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।

देवशयनी एकादशी को मनाने के फलस्वरूप मान्यता है कि यह व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, पापों का नाश होता है और सात्विक गुणों का विकास होता है। इस दिन दान देने, धार्मिक कार्यों में लगन और अच्छे कर्मों का आचरण करने का महत्व बताया जाता है।

देवशयनी एकादशी का पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है और भक्तों को शुभता, पुरुषार्थ, और धार्मिक सामर्थ्य को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

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