Published By:धर्म पुराण डेस्क

विविध रोगों में मेथी दाने का प्रयोग

मेथी के दाने अल्सर, पसलियों के दर्द, हृदय रोग, रक्तचाप, कमर दर्द, अफारा आदि रोगों के लिए लाभप्रद है. 

आइए जाने मेथीदाने में पाये जाने वाले औषधीय गुणों के बारे में…

अल्सर: 

मेथी का काढ़ा प्रतिदिन पीने से अल्सर से मुक्ति मिलती है.

गठिया व कमर दर्द: 

 

जिन स्त्रियों के पैरों व कमर में दर्द रहता हो उनके लिए मेथीदाने का लड्डू सर्वोत्तम है. मेथी दाने को घी में भूनकर कूटकर उसमें गुड़ मिलाकर बनाएं. 6 ग्राम मेथी दाना तथा 20 ग्राम गुड़ पानी में उबालकर पीने से कब्ज, गठिया और कमर दर्द की शिकायत दूर हो जाती है.

पसलियों का दर्द:

पसलियों में दर्द उठने पर 100 ग्राम मेथीदाना हल्का सा भून लें इसे कूटकर चूर्ण बनाकर इसमें चौथाई भाग काला नमक मिलाकर सुबह-शाम दो-दो चम्मच गर्म जल के साथ सेवन करें, कैसा भी असह्य दर्द हो 15 दिनों में खत्म हो जायेगा.

वात रोग:

रोज 20 ग्राम मेथीदाना का चूर्ण सुबह-शाम लेने से वात रोग दूर हो जाता है.

प्रसूतिः 

स्निग्ध, बलदायक और वायुनाशक होने के कारण प्रसूति के बाद किसी न किसी रूप में मेथी दाना का उपयोग होता है. इससे प्रसूति में दूध बढ़ता है तथा कमर को भी बल मिलता है.

बहुमूत्र: 

जिन्हें बार-बार पेशाब होता हो, उन्हें एक कप मेथी की पत्तियों का रस, आधा चम्मच कत्था और एक चम्मच शक्कर मिलाकर चार-पांच दिन रोज लेना चाहिए. बहुमूत्र से मुक्ति मिलेगी.

घुटनों का दर्द:

प्रातः काल 5 ग्राम मेथी चूर्ण की फंकी लेने से वृद्धावस्था में घुटनों का दर्द नहीं होता. मेथी दाने का काढ़ा रोज ढाई माह तक पीने से घुटनों और टखनों का प्रवाहयुक्त दर्द ठीक हो जाता है. एक गिलास पानी में एक चम्मच भर मेथी दाना डालकर धीमी आंच पर दस-पन्द्रह मिनट उबालने के बाद इस मेथी के काढ़े को सुबह चाय के स्थान पर तथा रात को भोजन के एक घंटे बाद रोज सेवन करें,

अफारा:

यदि आपका पेट गुड़गुड़ा रहा है, डकारें आ रही है, पेट में अधिक वायु बन रही हो तो मेथी दाना और गुड़ समान मात्रा में उबालकर सुबह-शाम सेवन करें, लाभ होगा. 

संग्रहणी मेथी चूर्ण, राई चूर्ण और अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर इसमें आवश्यकतानुसार नमक मिलाकर रख लें. पतला दस्त होने पर एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करें, संग्रहणी में अभूतपूर्व लाभ होगा.

हृदय रोग:

छह ग्राम मेथी दाने के काढ़े में 20 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें. इससे पुराना से पुराना हृदय रोग दमा और कफ वाली खांसी की शिकायत दूर हो जाती है.

 

रक्तचाप:

मेथी दाना और सोया के दाने समान मात्रा में पीसकर रोज सुबह-शाम जल के साथ लेने से रक्तचाप घटता है.

कर्णरोग:

मेथी दाना गाय के दूध में पीसकर कुनकुना करके कान में टपकाने से कान का बहना बंद हो जाता है.

नेत्र रोग:

मेथी के पत्तों का रस 5 बूंद रोज आंखों में डालने से आंखों की जलन, आंख में पानी आना तथा आंखों का लाल होना खत्म हो जाएगा. 

मेथी की पत्तियों की तरकारी से पित्त प्रकृति के मनुष्य का कब्ज दूर हो जाता है. मेथी की पत्तियों को पीसकर लेप करने से शरीर की बाहरी जलन शांत होती है.

चोट की सूजन:

मेथी की पत्तियों की पुल्टिस बांधने से चोट की सूजन मिटती है.

खांसी:

6 ग्राम मेथीदाना को पानी में उबालकर छान लें और उसमें 20 ग्राम शहद मिलाकर रोज सुबह-शाम सेवन करें. इससे कफ वाली खांसी तथा दमें की शिकायत दूर होगी.

गरमी के दिनो में धूप लगने परः

मेथी की पत्तियां पानी में भिगोकर रखें. अच्छी तरह भीगने पर मसल कर छान लें. यह पानी गर्मी की भीषणता से बचाता है.

तैलीय त्वचा हेतुः

मेथी की पत्तियां, तुलसी, नीम और पुदीना की पत्ती समान भाग लेकर पीस लें और इसमें दोगुनी मुल्तानी मिट्टी मिलाकर रोज चेहरे पर लगाएं. तैलीय त्वचा में निखार आएगा एवं कील-मुंहासों में भी लाभ होगा.

- रमेश कुमार

धर्म जगत

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