Published By:धर्म पुराण डेस्क

धन-वैभव प्रदायक मंत्र..

"प्रत्येक मनुष्य सुखी और समृद्ध होने का आकांक्षी रहता है। वह चाहता है कि उसका जीवन बिना किसी अवरोध के व्यतीत हो। इसी उद्देश्य के तहत हम इस अध्याय में धन वैभव प्रदायक मंत्रों का उल्लेख कर रहे हैं। इससे धन एवं ऐश्वर्य की वृद्धि, व्यापार में सफलता तथा भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी विनायक मंत्र:

निम्नवत मंत्र का 4 लाख बार जप करके दशांश का हवन बिल्व वृक्ष की लकड़ी से करें। फिर हवन के दशांश का तर्पण, तर्पण के दशांश का मार्जन तथा मार्जन के दशांश का ब्राह्मण भोजन कराएं। जिससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हवन में खीर की आहुति देने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। मंत्र इस प्रकार है- 

→ ॐ श्री गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा।

हरिद्रा गणपति मंत्र:

दाएं हाथों में अंकुश एवं मोदक, बाएं हाथों में पाश और दंत धारण किए, हल्दी जैसी आभा वाले तथा तीन नेत्र वाले पीत वस्त्र धारी हरिद्रा गणपति का ध्यान करते हुए 4 लाख बार निम्नलिखित मंत्र का जप करें। फिर हल्दी मिश्रित चावलों से दशांश का हवन, उसके दशांश का तर्पण, उसके दशांश का मार्जन तथा उसके दशांश का ब्राह्मण भोजन कराएं। इस विधि से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।

इसके बाद किसी भी मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कुंवारी कन्या द्वारा पिसी हल्दी का शरीर पर लेप करके तीर्थ के जल से स्नान करें तथा हरिद्रा गणपति का पूजन करें। फिर निम्नलिखित मंत्र का 1008 बार जाप करें। तत्पश्चात घी एवं मालपुआ से 100 मंत्रों का हवन करें। ब्रह्मचारी और गुरु को भोजन तथा दक्षिणा से संतुष्ट करें। इन सब कृत्यों से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। घर में लक्ष्मी की कृपा होती है। मंत्र नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है-

→ ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वरवरद,

→ सर्वजनं हृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा ।

महालक्ष्मी मंत्र:

श्री महालक्ष्मी के निम्नवत मंत्रों में से किसी एक मंत्र का जप मूंगे, लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला पर 1,25,000, 51,000, 21,000 अथवा 11,000 बार बिना क्रम तोड़े करें। जप से पूर्व प्रतिदिन लक्ष्मी जी का धूप, दीप एवं नैवेद्यादि से पूजन करें। जप पूर्ण होने पर हवन, मार्जन, तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन कराने पर पुरश्चरण पूर्ण होगा। इससे धन-संपदा की प्राप्ति होगी। आर्थिक कष्टों की निवृत्ति होगी। व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी तथा सभी संकट दूर होंगे। ये मंत्र निम्नवत हैं-

→ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ।

→ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

→ ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा । ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ।

→ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्धलक्ष्म्यै नमः ।

ज्येष्ठा लक्ष्मी मंत्र:

निम्नवत मंत्र का एक लाख बार जप करके दशांश का हवन, तर्पण, मार्जन तथा ब्राह्मण भोजन करवाएं। हवन में घी मिश्रित खीर का प्रयोग करें। जो व्यक्ति अपने परिवार के साथ इस प्रकार का पुरश्चरण पूर्ण करता है; उसे धन-धान्य, वैभव तथा कीर्ति प्राप्त होती है। मंत्र निम्नलिखित है

→ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आद्यलक्ष्मी स्वयंभुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः ।

कुबेर मंत्र निम्नवत मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करें तथा वट वृक्ष की समिधाओं से 10 आहुतियां दें। इस प्रकार प्रतिदिन होम करने से साधक कुबेर के समान संपत्तिवान हो सकता है। मंत्र निम्नलिखित है-

→ ॐ वैश्रवणाय स्वाहा ।

बगलामुखी मंत्र:

शत्रु द्वारा अपने धन वैभव को बचाने के लिए निम्नवत मंत्र का संकल्पपूर्वक एक लाख बार जप करें। फिर चम्पा के फूलों से दशांश का हवन, उसके दशांश का तर्पण एवं उसके दशांश का मार्जन करें। इसके बाद मार्जन के दशांश का ब्राह्मण भोजन कराएं। 

इस विधि से यह मंत्र सिद्ध होकर फल प्रदान करने में पूर्णतः समर्थ हो जाता है। इसके पश्चात पीले वस्त्र पहनकर और पीले आसन पर स्थित होकर हल्दी की माला से पीतवर्णा बगलामुखी देवी का ध्यान करके इसी मंत्र का 10 हजार बार जप करें। फिर हरिद्रा द्वारा 1000 बार होम करने पर शत्रुओं का स्तंभन हो जाता है। मधुत्रय मिश्रित तिलों से हवन करने पर शत्रु वशीभूत होकर धन-लाभ पहुंचाते हैं। मंत्र नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है- 

→ ॐ ह्रीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं,

→ स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

गणपति मंत्र:

स्मरण शक्ति में वृद्धि, विद्या प्राप्ति में बाधाओं का निवारण, बुद्धि को तीव्र बनाने तथा सुख-समृद्धि के लिए श्री गणपति के निम्नलिखित मंत्रों में से किसी एक मंत्र की एक माला का जप प्रतिदिन नियमपूर्वक करें। जप से पहले गणपति का पूजन धूप, दीप, नैवेद्य तथा सिंदूर से करें, ये मंत्र इस प्रकार हैं-

→ ॐ गं गणपतये नमः ।

→ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गणेश्वराय ब्रह्मस्वरूपाय चारवे, 

→ सर्वसिद्धि प्रदेशाय विघ्नेश्वराय नमो नमः ।

सरस्वती मंत्र:

श्री सरस्वती के निम्नवत मंत्रों में से किसी एक का जप 100000, 51000, 21000 या 11000 बार करें। फिर दशांश का हवन, दशांश का तर्पण, दशांश का मार्जन एवं दशांश का ब्राह्मण भोजन कराएं। इससे विद्या-धन की प्राप्ति होती है, स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है तथा बुद्धि तीव्र होती है। ये मंत्र इस प्रकार हैं- 

→ ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं ॐ सरस्वत्यै नमः ।

→ ॐ ऐं नमः ।

→ ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।


 

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